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प्रिये आत्मन

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जय माँ

बसन्त पंचमी की पूण्य बेला में आज आप सभी माँ गंगा की गोद मे बैठकर अक्षयवट की शीतल छाया में माधव जी के सानिध्य में,तीर्थराज प्रयाग में अपने अंदर के पांच तत्वों को सिंचित कर रहे हैं माँ कामाख्या परिवार में शामिल होकर ,आचार्य एवं समस्त संत चरण के पावन शरण से आपको ऊर्जा मिल रही है । अपने पाँच तत्वों को यथा प्रेम,भाव,अनुशासन, दिव्यता और संतुलन को साधने का प्रयाश करें,आपके अंदर बुद्धि -विवेक के देवी जागृत हों और आपके एवम आपके परिवार में सदा के लिये बसन्त छा जाये, आपका मंगल हो,कल्याण हो । लक्ष्मी से व्यवहारिक जीवन की समस्त वस्तुओं का क्रय-विक्रय होता है किन्तु सरस्वती से हमारा जीवन संचालित होता है,सरस्वती हीं निर्णय करती हैं कि लक्ष्मी का सदुपयोग कैसे और कहाँ करना चाहिये ,विद्या विहीन मनुष्य किसी काम का नही होता,ज्ञान एक ऐसी उपलब्धि है ,एक ऐसा मार्ग है जो न केवल प्रकृति को बताता है,अपितु संसार सागर से भी पार लगाता है और परमात्मा की अनुभूति करा देता है । समस्त पापों का शमन कर देता है ज्ञान ,और ज्ञान के लिये विद्या और सद्बुद्धि का होना नितान्त आवश्यक है । जब ज्ञान हो जाये तब जीवन मे जो आनंद आता है वही वास्तविक बसन्त है,जिसमे उत्सव मनाने की आवश्यकता नही पड़ती,बल्कि जीवन हीं उत्सव हो जाता है । लक्ष्मी से सुख और सरस्वती से आनंद की प्राप्ति होती है ,तो आइये विद्या की महादेवी की स्तुति कर अपने जीवन को धन्य करें और उनसे ऐसी साकारात्मक बुद्धि की मांग करें जो इन्सानियत न खोने दे और परमात्मा के मार्ग में ले चले ,आप सबको बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें एवम मंगल कामनायें ।

जय माँ जय माँ जय माँ ।

संकर्षण शरण (गुरु जी)

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