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मेज़बान की अपने देश मे जीतने

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Sanjay Dubey: मेज़बान की अपने देश मे जीतने औऱ मेहमान के विदेशो में हारने की बात क्रिकेट में सामान्य हो गयी है।द.अफ्रीका ,भारत मे 3-0से टेस्ट सीरीज हार कर गया था अब सेंचुरियन में तीसरे टेस्ट के पहले से आशंका जताई जा रही हैं कि नतीजा 3-0 का ही रहेगा।
मीडिया ने भारत के द अफ्रीका दौरे के पहले 25 साल का बदला लेने का बड़ा प्रचार किया था लेकिन अग्नि परीक्षा हो रही है खासकर भारतीय बल्लेबाज़ों की,विराट कोहली और हार्दिक पांड्या को छोड़कर कोई भी बल्लेबाज़ कुकुबरा बॉल फेंकनेवाले फिलेंडर,मोर्कल,लूँगीनि का मुकाबला नही कर पाये है।धवन,मुरली विजय,राहुल,रोहित,पुजारा सभी लड़खड़ा रहे है। विराट औऱ हार्दिक भी एक एक पारी के नायक रहे है,तीन पारियो में इन्हें भी सनसनाती बाल ने हक़ खवा दिया है।
पहले टेस्ट में शिखर बाहर हुए, राहुल आये, अब राहुल भी बतौर ओपनर असफल हो गए।एकदिवसीय मैच के हीरो रोहित परंपरागत रूप से टेस्ट नही खेल पाये तो हल्ला हुआ कि उपकप्तान अजिंक्या रहाणे को तीसरे टेस्ट में खिलाने की रणनीति बन रही है।इसका मतलब है कि रोहित का बाहर जाना तय है।जिस तरह से टीम में खिलाड़ी अंदर बाहर हो रहे है उससे लगता है कि टीम के हेड कोच रवि शास्त्री और कप्तान विराट कोहली दबाव में है।भले ही विराट कह रहे है कि प्लेइंग 11 के जीत जाने पर कोई बात नही होती है लेकिन कप्तान को ये समझ जरूर होगी कि हारने पर ही प्रश्न खड़े होते है।हर हार के बाद असफल बल्लेबाज़ों के प्रदर्शन पर समीक्षा होती है नही तो शिखर और साहा एक टेस्ट के बाद बाहर नही होते, खैर, अब लगातार दो टेस्ट जीतनेवाले द.अफ्रीका की टीम सेंचुरियन में भी उछाल लेती ग्रीन विकेट पर कहर बरपायेगी तब अंजिक्या रहाणे की भी परीक्षा होगी। फिलहाल विदेशो (ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, इंग्लैंड और द.अफ्रीका) में खेले गये पिछले 28 टेस्ट में सिर्फ 2 टेस्ट जीतना यह बताता है कि विदेश में हम जीत नही पाते औऱ अपनेदेश में हार हमारी होती नही।

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