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सुविचार:-जैसे सुख या दुःख परमात्मा का प्रसाद है ठीक उसी प्रकार डाँट-फटकार माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद एवम प्रसाद है, इसे सदैव ग्रहण करते रहो । शिक्षा:-प्रसाद से जीवन सँवर जाता है,लेते रहो । जय माँ,संकर्षण शरण (गुरु जी)

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