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57 राईस मिलर्स को तीन करोड़ रूपये का बेजा फायदा

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V.C.SHARMA:

प्रोत्साहन राशि देने वाले फूड आफिसर और डीएमओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने उठी मांग

रायगढ़ 28 जनवरी। बीते साल कष्टम मिलिंग के मामले में क्षमता से अधिक चावल जमा करने वाले जिले के 57 राईस मिलरों को प्रोत्साहन राशि के मद में तीन करोड़ रूपये का बेजा फायदा देने और सरकार को चूना लगाने वाले रायगढ़ जिले के फुड आफिसर जी.पी. राठिया और तत्कालीन डीएमओ भगत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने हेतु रायगढ़ सिटी कोतवाली में जिले के दो वरिष्ठ पत्रकारों ने आवेदन प्रस्तुत किया गया है।
आवेदन की प्रतिलिपि नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक को भी दी गई है।

वरिष्ठ पत्रकार सुभाष त्रिपाठी और रफी अहमद कुरैशी द्वारा दिये गये उक्ताशय के आवेदन में उल्लेख किया गया है कि बीते वर्ष जिले के राईस मिलर्स ने अपनी वास्तविक मिलिंग क्षमता को छिपाते हुए भ्रामक और झूठी जानकारी देकर खाद्य विभाग में अपना पंजीयन करा लिया था, जिले के खाद्य विभाग ने राईस मिलर्स की इस करतूत से बखूबी वाकिफ रहते हुए इस मामले में चुप्पी साध रखी थी। वर्ष 2016-17 में ज्यादा से ज्यादा मिलिंग करने वाले राईस मिलर्स को राज्य शासन द्वारा प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की गई थी, प्रोत्साहन राशि के लालच में जिले के 57 राईस मिलर्स ने अपनी वास्तविक एवं पंजीकृत क्षमता से करीब तिगुना चावल जमा करके प्रोत्साहन राशि के लिये अपना दावा पेश कर दिया था। उसी समय रायगढ़ में पदस्थ प्रशिक्षु सहायक कलेक्टर प्रभात मल्लिक द्वारा इस मामले का स्वत:संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू की गई तो सभी मिलर्स की ओर से अपने पंजीकृत क्षमता में संशोधन किये जाने हेतु अपना आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसे राज्य शासन के पास रायपुर भेजा जाना था। लेकिन तभी मल्लिक को ट्रेनिंग के लिये मसूरी जाना पड़ा तो खाद्य अधिकारी राठिया और डीएमओ भगत द्वारा राईस मिलर्स से मिलीभगत कर उन्हें सदोष लाभ पहुंचाने और शासन के रूप में आम जनता को सदोष हानि पहुंचाने के दुराशय से न केवल क्षमता संशोधन के लिये मिलर्स द्वारा प्रस्तुत आवेदन को शासन को भेजने के बजाय अपने पास दबा कर रख लिया गया। बल्कि पूरे मामले में लीपा-पोती करके मिलर्स को प्रोत्साहन राशि (बोनस) के रूप में तीन करोड़ रूपये भी बांट दिया।

इस मामले में की गई प्रारंभिक जाँच में यह स्पष्ट हो चुका है कि इन सभी 57 राईस मिलर्स को अपने पंजीकृत क्षमता के मुताबिक अधिकतम कुल 1219400 टन चावल जमा करना था जबकि उनके द्वारा 1890213 टन चावल जमा किया गया है, इस लिहाज से पहली नजर में क्षमता में वृद्धि हेतु संशोधन आवेदन पत्र को जान-बूझ कर शासन के पास नहीं भेजने वाले खाद्य अधिकारी और डीएमओ के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला बनता है। इसलिये पुलिस का यह दायित्व है कि वह अधिकारी द्वय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उनके खिलाफ अदालत में चालान पेश करे। अगर पुलिस अपने इस दायित्व से पीछे हटती है तो पत्रकार द्वय द्वारा इस मामले में अदालत में परिवाद पत्र पेश किया जायेगा।

पत्रकार द्वय ने नवपदस्थ पुलिस अधीक्षक जिन्हें आवेदन की प्रतिलिपि दी गई है से भी यह अपेक्षा की है कि वे इस मामले में कानून के मुताबिक कार्यवाही के निर्देश अपने मातहत अधिकारियों को देंगे।

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