Home States Andhra Pradesh आंध्र सरकार ने राज्य में शक्तियों के इस्तेमाल के लिए CBI को दी ‘सामान्य’ रजामंदी वापस ली

आंध्र सरकार ने राज्य में शक्तियों के इस्तेमाल के लिए CBI को दी ‘सामान्य’ रजामंदी वापस ली

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आंध प्रदेश की चंद्रबाबू नायडू सरकार ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को राज्य में कानून के तहत शक्तियों के इस्तेमाल के लिए दी गई ‘सामान्य रजामंदी’ वापस ले ली. प्रधान सचिव (गृह) ए आर अनुराधा द्वारा आठ नवंबर को इस संबंध में जारी एक ‘गोपनीय’ सरकारी आदेश गुरुवार की रात ‘लीक’ हो गया.

आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (गृह) एन चिना राजप्पा ने राज्य सरकार के इस कदम को सही ठहराते हुए कहा कि देश की शीर्ष जांच एजेंसी पर लगे कुछ आरोपों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला किया गया है.

राजप्पा ने सचिवालय में संवाददाताओं से कहा,‘हमें सीबीआई में भरोसा है लेकिन इसके शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ हाल में लगे आरोपों के कारण हमने सामान्य रजामंदी वापस ले ली. यानी सीबीआई को हर मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की अनुमति हासिल करनी होगी.’

उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि वकीलों और बुद्धिजीवियों के परामर्श पर सामान्य रजामंदी वापस ली है. उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक की सरकार ने भी सीबीआई के लिए सामान्य रजामंदी वापस ले ली है. उन्होंने कहा,‘जब भी सीबीआई आग्रह करेगी, हम जरूरी अनुमति दे देंगे.’

ताजा सरकारी आदेश में कहा गया,‘दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम, 1946 की धारा छह के तहत दी गई शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, सरकार दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को आंध प्रदेश राज्य में इस कानून के तहत शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल हेतु दी गई सामान्य रजामंदी वापस लेती है.’

इस साल तीन अगस्त को आंध्र सरकार ने भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत विभिन्न कानूनों के तहत अपराधों की जांच के लिए केन्द्र सरकार, केन्द्र सरकार के उपक्रम के अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ जांच के लिए आंध्र प्रदेश में शक्तियों और क्षेत्राधिकार के इस्तेमाल के लिए दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के सभी सदस्यों को ‘‘सामान्य रजामंदी’’ देने वाला सरकारी आदेश जारी किया था. सीबीआई दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान कानून के तहत काम करती है.

इस अधिनियम की धारा छह के तहत, राज्य सरकार राज्य में शक्तियों के इस्तेमाल के लिए सीबीआई को ‘नियमित रूप से’ रजामंदी देती है और आंध्र सरकार ने भी पिछले कुछ वर्ष में समय समय पर संबंधित आदेश जारी किये थे.

इस साल मार्च में नरेंद्र मोदी नीत सरकार से संबंध तोड़ने के बाद से नायडू आरोप लगाते रहे हैं कि केन्द्र सीबीआई जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने में कर रहा है.

कुछ कारोबारी प्रतिष्ठानों पर आयकर अधिकारियों के हालिया छापे से नायडू बहुत नाराज हैं क्योंकि इनमें से कुछ प्रतिष्ठान राज्य की सत्तारूढ तेदेपा के करीबियों के हैं. बाद में उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार छापा मारने वाले आयकर अधिकारियों को पुलिस सुरक्षा मुहैया नहीं कराएगी.

विपक्षी दलों ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि राज्य सरकार सीबीआई को उसकी शक्तियों के इस्तेमाल से नहीं रोक सकती. मुख्य विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विवादित फैसला सिर्फ इसलिए किया गया है क्योंकि मुख्यमंत्री सीबीआई से डरे हुए हैं.

वाईएसआरसी की राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य अंबाती रामबाबू ने कहा,‘चंद्रबाबू नायडू को स्पष्टीकरण देना चाहिए कि वह सीबीआई को राज्य में आने से क्यों रोक रहे हैं.’

पूर्व सांसद और पेशे से वकील उनदावल्ली अरुण कुमार ने कहा,‘राज्य सरकार का आदेश वैध नहीं है. सीबीआई अदालत के निर्देश पर जांच कर सकती है. केवल राज्य से संबंधित मामलों में एजेंसी को सरकार की अनुमति की जरूरत होती है.’

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