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ब्राह्मण युवा पहल का संवेदना

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गरीबी,एक अभिशाप है,अभाव की दुनियां में कुछ न होने का अहसास,इसके बावजूद लोग जीते है,किसी के सहारे, गर सहारा ही खो जाये तो क्या दुनियां खत्म हो जाती है? नही एक नई दुनियां का सृजन होता है जिसमे अपने ही मददगार बन कर आते है और कठिन सी बनती जिंदगी में आशा की किरणें बिखरती है।कुछ ज्यादा दिन नही हुए एक कहर बरपाती घटना को हुए……
बात 17 जनवरी2018 की है,गरीबी के चलते मृत पति के शव को घर तक लाने के लिए कोई साधन न मिल सका तो मृत संजय शर्मा की पत्नी ने अपनी चार साल की बेटी को कंधे में और पति के शव को ठेला में रख कर ले आयी।कितनी मार्मिक और अमानवीय घटना थी।तब एक प्रश्न उभरा था क्या इंसान,केवल हाड़ मांस का लोथड़ा है ?
इस प्रश्न को एक सामाजिक संगठन” ब्राह्मण युवा पहल” ने गलत साबित किया और यह भी बताया कि इंसान और इंसानियत जिंदा है,संवेदना मरी नही है। राहुल शर्मा,उनके युवक-युवती साथियो ने इस गरीब परिवार के सहयोग के लिये आगे आये। सबसे पहले मृत शरीर की अंत्येष्टि किया,मृत परिवार के घर महीने भर का राशन दिया,अस्थि संकलन किया,नियंम से तर्पण किया,दशगात्र किया और आज तेरहवी कार्यक्रम कर विधि विधान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। अबोध बच्ची की शिक्षा की जिम्मेदारी ली। संजय शर्मा की पत्नी मधु के लिए आजीविका की व्यवस्था का प्रयास और जिस फैक्टरी में संजय शर्मा काम करते थे वहां से मुआवजा दिलाने का प्रयास भी ब्राह्मण युवा पहल संगठन कर रहे है।
ये संगठन रक्त दान के लिए भी संकल्प लिया हुआ है।पहले 900 यूनिट दान किये है,इस कार्य के लिए स्वास्थथ्य विभाग ब्राह्मण युवा पहल को सम्मानित कर चुका है उसके बाद अबतक1335 यूनिट और रक्त दान कर चुके है।ये संगठन जीवन के साथ और जीवन के बाद भी समाज के साथ है।क्या सराहनीय कार्य के लिये ताली नही बनती है?

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