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डॉक्टरों का दावा, दिल्ली की हवा किसी मौत से कम नहीं

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वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली वासियों को सांस लेने में हो रही तकलीफ के बीच विशेषज्ञों ने लोगों से प्रदूषण के नियमों का उल्लंघन करने वालों की जानकारी अधिकारियों को देने की अपील की है. साथ ही कहा है कि प्रत्येक नागरिक निजी वाहनों का इस्तेमाल कर करके एक बदलाव ला सकता है. डॉक्टरों ने भी श्वसन समस्याओं के कारण पीड़ित मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी को लेकर चिंता व्यक्त की है. अधिकारियों ने बताया कि हवा का रूख बदलने और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाये जाने के कारण एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार सोमवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में तेजी से गिरावट आई और यह गंभीर श्रेणी में पहुंच गई.

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दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वाइरन्मेंट (सीएसई) की कार्यकारी निदेशक अनुमिता राय चौधरी ने कहा, ‘‘जमीनी स्तर पर स्थिति को और पारदर्शी बनाने में जनता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.  लेकिन हमें अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी जिम्मेदार बनने की जरूरत है.’’

उन्होंने कहा कि यह निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करके, साझा परिवहन, साइकिल और सार्वजनिक परिवहन के प्रयोग या जितना संभव हो सके पैदल चल कर किया जा सकता है क्योंकि निजी जिम्मेदारी से भी एक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

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पूर्व अतिरिक्त निदेशक और सीपीसीबी में वायु गुणवत्ता प्रबंधन संभाग के प्रमुख दीपांकर साहा ने बताया कि लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करके, कूड़ा नहीं जला कर और पटाखा नहीं फोड़ कर उत्सर्जन कम करने में एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि सांस लेने में समस्या और अन्य श्वसन बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या में पिछले कुछ दिनों में बढ़ोतरी हुई है.

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