Home Breaking News 2019 में PM मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बने तो होंगे 5 बड़े नुकसान, यहां पढ़िए क्यों?

2019 में PM मोदी दोबारा प्रधानमंत्री नहीं बने तो होंगे 5 बड़े नुकसान, यहां पढ़िए क्यों?

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दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दोबारा पीएम बनने की ‘भविष्यवाणी’ की है. हालांकि, उनकी यह ‘भविष्यवाणी’ अनजाने में की गई बात से निकली. दरअसल, भारत की यात्रा पर आए दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे-इन ने पीएम मोदी के साथ संयुक्त घोषणा के दौरान कहा कि वह 2020 में प्रधानमंत्री की कोरिया यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि हम विभिन्न बहुपक्षीय सम्मेलनों में अपनी घनिष्ठ बातचीत जारी रखेंगे.’ हालांकि, 2019 में होने वाले आम चुनाव में पीएम मोदी दोबारा चुने जाएंगे या नहीं इसकी चर्चा शुरू हो गई है. लेकिन, इस बात यह अंदाजा लगाया जाने लगा है

पीएम नहीं बने तो होगा नुकसान
पीएम नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं ये तो चुनाव के बाद पता चलेगा. लेकिन, उनके प्रधानमंत्री न बनने से देश को क्या नुकसान होंगे इसका अंदाजा लग गया है. दुनिया के बड़े ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए (CLSA) के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वुड ने कुछ समय पहले ही कहा था कि अगर मोदी के दोबारा पीएम नहीं बने तो भारत को 5 बड़े नुकसान होंगे.

 

पहला नुकसान: ग्रोथ को लगेगा झटका
साल 2019 में देश में आम चुनाव होने हैं. 2014 की तर्ज पर ही बीजेपी के प्रमुख चेहरा नरेंद्र मोदी होंगे. लेकिन, क्या वो फिर से पीएम बनेंगे? ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए के इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वुड का कहना है कि नरेंद्र मोदी अगर फिर से चुनकर नहीं आते हैं तो भारत की ग्रोथ को बड़ा धक्का झटका लगेगा. क्रिस्टोफर वुड ने कुछ वक्त पहले अपने विकली नोट ग्रीड एंड फीयर में कहा था कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से पांच साल के लिए प्रधानमंत्री नहीं बनते हैं तो भारत की ग्रोथ स्टोरी को बड़ा झटका लगेगा.

 

दूसरा नुकसान: गिरेगा रुपया
रुपया इस वक्त इतिहास के निचले स्तर के आसपास है. लेकिन, 2019 में अगर नरेंद्र मोदी दोबारा पीएम नहीं चुने गए तो रुपये में और गिरावट देखने को मिलेगी. रुपए में बड़ी कमजोरी आने की आशंका है. शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स के निवेश पर भी कम रिटर्न मिलेंगे. साथ ही, रुपए में कमजोरी से महंगाई बढ़ने की आशंका है.

तीसरा नुकसान: बढ़ेगी महंगाई
रुपए में कमजोरी आने से विदेशों से क्रूड खरीदना महंगा होगा. लिहाजा पेट्रोल-डीजल के दाम में वृद्धि होगी. ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से पहले खाने-पीने से लेकर बाकी चीजों की महंगाई में इजाफा होगा. लिहाजा, देश में महंगाई बढ़ने के साफ संकेत मिलते हैं.

चौथा नुकसान: लुढ़केगा शेयर बाजार
क्रिस्टोफर के मुताबिक, अगर मोदी प्रधानमंत्री बने रहते हैं तो लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजार सबसे ज्यादा मुनाफा दिलाने वाले रहेंगे. हालांकि, इस साल की पहली छमाही में बहुत अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद नहीं है. वुड का मानना है कि भारतीय बाजारों की चाल करेंसी और कच्चे तेल की कीमतों पर भी निर्भर करेगी.

पांचवा नुकसान: इन्वेस्टमेंट साइकिल होगी शुरू
क्रिस्टोफर वुड ने अपने नोट में लिखा था कि भारत में इन्वेस्टमेंट साइकिल फिर से शुरू हो रहा है. इससे बैंकिंग सिस्टम के एनपीए को सुधारने में मदद मिलेगी. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन प्रयासों के अच्छे नतीजे कब तक सामने आएंगे और सरकार अपने स्तर पर इकोनॉमी को बेहतर बनाने से जुड़े फैसलों को कितनी ताकत और सक्रियता से लागू करती है. अगर पीएम मोदी दोबारा नहीं चुने गए तो नई सरकार अपने हिसाब से इन्वेस्टमेंट साइकिल शुरू करेगी.

कमजोर सरकार बनने की आशंका
अमेरिकी फर्म मॉर्गन स्‍टेनली की हाल में जारी एक रिपोर्ट में भी भारत में कमजोर सरकारबनने की आशंका जताई थी. रिपोर्ट के मुताबिक, अगले साल होने वाले आम चुनाव में कोई पार्टी अपने बूते सरकार नहीं बना पाएगी. ऐसे में भाजपा भी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाएगी. कंपनी के मुताबिक, गठबंधन की कमजोर सरकार निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता है.

‘आशावादी नहीं रहेगा बाजार’
मॉर्गन स्‍टैनली का कहना है कि बाजार का रुख आगामी आम चुनाव में पिछले लोकसभा चुनाव की तरह आशावादी नहीं रहेगा. कंपनी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र चुनाव से कुछ ही महीने दूर है. ऐसे में आने वाले कुछ महीनों में बाजार में चुनाव परिणाम को लेकर कयासबाजी शुरू होने की संभावना है. बाजार हमेशा मौजूदा से ज्‍यादा मजबूत सरकार की उम्‍मीद के साथ चुनाव में जाता है. लेकिन, वर्ष 2019 के चुनावों में यह लागू नहीं होगा, क्‍योंकि अगले साल वर्तमान से कमजोर सरकार बनने की संभावना है.

मॉर्गन स्टेनली की चेतावनी
अमेरिकी फर्म ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2019 में बाजार का माहौल साल 2014 के आम चुनावों से पहले जैसा नहीं रहेगा. मॉर्गन स्‍टैनली ने पिछले पांच आम चुनावों के आधार पर यह निष्‍कर्ष निकाला है. कंपनी का कहना है कि कोई सरकार पूर्ण बहुमत के साथ चुनाव में नहीं आएगी. ऐसे में यह कमजोर सरकार बनने की ओर इशारा कर रहा है.

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