Home Breaking News मोदी-पुतिन की डील पर ट्रंप की टेढ़ी नजर, S-400 पर CAATSA बैन का डर

मोदी-पुतिन की डील पर ट्रंप की टेढ़ी नजर, S-400 पर CAATSA बैन का डर

0
0
49

अमेरिकी प्रतिबंध के साए में भारत और रूस एस-400 डिफेंस मिसाइल सिस्टम डील पर सहमति करने के लिए तैयार है. पांच बिलियन डॉलर की इस मेगा डिफेंस डील पर अमेरिका काटसा प्रतिबंध (काउंटरिंग अमेरिकन एडवर्सरीज थ्रू सैंकशन्स- CAATSA) लगा सकता है. पिछले महीने अमेरिका ने चीन पर रूस से लड़ाकू विमान और मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए इसी कानून का सहारा लिया है.

गौरतलब है कि काटसा प्रतिबंध का इस्तेमाल अमेरिका ने उन देशों पर दबाव बनाने के लिए किया है जो किसी विरोधी देश के साथ अहम रक्षा सौदा करता है. इस कानून गौरतलब है कि भारत ने अपनी रक्षा जरूरतों के चलते अमेरिकी प्रतिबंध की संभावनाओं को दरकिनार करते हुए रूस के साथ इस समझौते को करने का फैसला लिया है. भारत को उम्मीद है कि उसकी रक्षा जरूरतों को समझते हुए एस-400 डील पर अमेरिका काटसा प्रतिबंध नहीं लगाएगा.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगस्त में रूस की इस आधुनिक डिफेंस मिसाइल सिस्टेम को ध्यान में रखते हुए काटसा कानून को मंजूरी दी थी. अमेरिका ने इस कानून के जरिए रूस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के हितों के खिलाफ काम करने के  लिए तैयार किया है. गौरतलब है कि इस कानून को रूस द्वारा 2014 में यूक्रेन पर हमला कर क्रीमिया पर कब्जा करने, सीरिया गृह युद्ध में शरीक होने और 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में हस्तक्षेप करने की गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है.

सिंतबर में चीन के खिलाफ इस कानून के तहत प्रतिबंध लगाया. वहीं अमेरिकी प्रशासन ने भारत और रूस के बीच होने वाले इस डिफेंस डील पर कहा है कि उसकी अपने सभी एलाइज और पार्टनर देशों (मित्र और सहयोगी देशों) से अपील है कि वह रूस के साथ डिफेंस डील न करें नहीं उसके पास काटसा कानून का इस्तेमाल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा.

अमेरिकी प्रसाशन का दावा है कि काटसा प्रतिबंध एस-400 डिफेंस डील पर लगाया जा सकता है क्योंकि इस कानून के सेक्शन 231 में ऐसी डिफेंस डील पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है जहां सैन्य क्षमता में नई अथवा गुणात्मक वृद्धि होने की संभावना है.

भारत सरकार का दावा है कि उसे दक्षिण एशिया में अपनी स्थिति को सुरक्षित करने के लिए इस मिसाइल की जरूरत है. रक्षा जानकारों ने दावा किया है कि इस मिसाइल के जरिए जहां भारत चीन को काबू करने की कोशिश करेगा वहीं इससे उसे पाकिस्तान की मौजूदा क्षमता से ऊपर उठने में मदद मिलेगा. गौरतलब है कि दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के पास मौजूदा समय में किसी लड़ाकू विमान को ट्रैक करने के साथ-साथ उसे मार गिराने की क्षमता है. वहीं उसकी छमता में छिपकर वार करने वाले लड़ाकू विमानों (स्टील्थ फाइटर जेट) को भी मार गिराने की क्षमता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.