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जेटली ने छत्तीसगढ़ के इस स्कूल को देशभर में किया लागू

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बिलासपुर: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में आदिवासियों के लिए नई क्रांति लाने जिस एकलव्य स्कूल का एलान किया, वह छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में है। ग्राम पर्रीनाला स्थित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय से प्रभावित होकर इस योजना को देशभर में लागू किया है।

इसका लाभ जिले के गौरेला, पेंड्रा, मरवाही जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों को भी मिलेगा। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल रायपुर में फरवरी 2017 को घोषित हाई स्कूल सर्टिफिकेट परीक्षा परिणाम में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पर्रीनाला राजनांदगांव का परिणाम शत प्रतिशत रहा।

इसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है और यहां शिक्षा का स्तर काफी पीछे है। जनजातीय इलाकों में विद्यालयों की दूरी, घर में सुविधाओं एवं पैसों का अभाव जैसे कई कारणों के चलते बच्चे या तो विद्यालय नहीं जाते या फिर प्राथमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं।

ऐसी परिस्थितियों में लक्षित समूह तक शिक्षा को पहुंचाने के लिए एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय योजना वरदान साबित हुआ है। भारत सरकार ने इसे पीआईबी की वेबसाइट के माध्यम से भी खुलासा किया है। इसमें देशभर में संचालित अन्य एकलव्य स्कूलों का भी जिक्र किया गया है। एकलव्य स्कूल से पढ़कर देश-विदेश में नया आयाम रचने वाले बच्चों का भी जिक्र है।

यह है मुख्य उद्देश्य

वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजाति का साक्षरता प्रतिशत 47.10 था, जो वर्ष 2011 की जनगणना में बढ़कर 58.96 हो गया। इस बढ़ोतरी के बावजूद यह देश की औसत साक्षरता दर 72.99 प्रतिशत से काफी पीछे है। सरकार, शिक्षा और विभिन्न् प्रयासों के माध्यम से इस अंतर को पाटने का प्रयास कर रही है।

अनुसूचित जनजाति के छात्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार की योजना एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआर स्कूल) एक मिसाल बनेगी। इन विद्यालयों से पढ़े छात्र और छात्राएं न केवल प्रतियोगी परीक्षा उत्तीर्ण कर रहे हैं, बल्कि छात्राएं अभिजात्य मानी जाने वाली सौंदर्य प्रतियोगिताएं भी जीत रही है।

सरकार के ब्लूप्रिंट में खास

– ईआईटी ट्राइबल डेवलपमेंट एजेंसी और इंटीग्रेटेड ट्राइबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत क्षेत्र में कम से कम एक विद्यालय।

– जिस क्षेत्र की कम से कम 50 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति हो, उस क्षेत्र में यह स्कूल खोलना अनिवार्य होगा।

– 15 एकड़ भूमि में विकसित होने वाले इन विद्यालयों के भवन से लेकर, छात्रावास और स्टाफ क्वार्टर 12 करोड़ में बनेंगे।

– पहले साल में प्रति विद्यार्थी खर्च 42 हजार स्र्पए आंका गया है, जबकि दूसरे साल से 10 फीसदी बढ़ाने का प्रावधान है।

– सभी बच्चों पर शिक्षक बराबर ध्यान रख सके, इसलिए हर सेक्शन में सिर्फ 30 बच्चे ही रखे जाएंगे।

– कक्षा 6 से 9 तक प्रत्येक कक्षा में दो सेक्शन होंगे। वहीं 10 से 12 वीं तक की कक्षाओं के तीन सेक्शन होंगे।

– इन विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की बहाली राज्य सरकार द्वारा किए जाने का प्रावधान है।

– इन विद्यालयों में स्कूल भवन के साथ छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, बच्चों के खेलने के लिए मैदान समेत हर आधुनिक सुख सुविधा।

– इन स्कूलों में विद्यार्थियों की शिक्षा, खानपान के साथ-साथ कम्प्यूटर की शिक्षा भी मुफ्त प्रदान की जाएगी।

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