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जोगी का सबसे बड़ा दांव, रमन के खिलाफ राजनांदगांव से लड़ेंगे चुनाव

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रायपुर / छत्तीसगढ़ में चुनाव साल के शुरू होते ही नेताओं ने भी पूरी तैयारी शुरू कर दी है. पिछले 14 सालों से सत्ता पर बैठी बीजेपी और उसके सीएम रमन सिंह को शिकस्त देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व कांग्रेस नेता अजीत जोगी ने नई रणनीति बनाई है. कांग्रेस से अलग होकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस बनाने वाले अजीत जोगी ने इस बार रमन सिंह को उनके घर में ही घेरने की तैयारी कर रहे हैं. खबरों की मानें तो वह आने वाले विधानसभा चुनावों में अजीत जोगी सीएम रमन सिंह के खिलाफ राजनांदगांव से चुनाव लड़ेंगे.

यहां आपको यह बताते चले की अजीत जोगी का यह पैतरा नई राजनीतिक इच्छा नहीं बल्कि जोगी पिछले कई चुनावों में मुख्यमंत्री के सामने चुनाव लड़ने की बात करते आए है लेकिन उस समय कांग्रेस ने उन्हे अपनी इस ख्वाहिश को पूरा नहीं करने दिया। लेकिन अब जब वे खुद अपनी पार्टी के मुख्या है और पूर्ण रूप से कमान उनके हाथ में है तो वे अपनी इस पूरानी इच्छा को पूरा करने की कोशिश जरूर करेंगे।दिसंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस बार राजनांदगांव विधानसभा में सबकी निगाहें टिकी रहेंगी क्योंकि वहां मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी चुनाव लड़ने जा रहे हैं। जोगी ने ऐलान कर दिया है कि वे मुख्यमंत्री के खिलाफ ही चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कह दिया है कि इस बार चुनाव रमन और जोगी के बीच ही होगा, इसलिए चुनाव मैदान में भी यही दोनों नाम आमने-सामने होंगे। चुनावी शंखनाद के लिए जोगी बाकायदा 11 फरवरी को राजनांदगांव जा रहे हैं और वहां पर अनूठा आयोजन करेंगे- जोगी के साथ-एक शाम।आपको बता दें कि राजनांदगांव विधानसभा सीट से रमन सिंह साल 2008 से विधायक के तौर पर जीतते आ रहे है. लेकिन लगता है कि इस बार उन्हें उनके घर में ही चुनौती मिलने वाली है. राज्य में तीसरी शक्ति के रुप में अपनी पार्टी को स्थापित करने में लगे जोगी का यह विधानसभा चुनाव के लिए सबसे दांव है क्योंकि रमन के खिलाफ जोगी के चुनाव लड़ने का सीधा अर्थ है कि पूरा चुनाव इन्हीं दोनों पर केंद्रित हो जाएगा। यह देश के चुनिंदा हाईप्रोफाइल चुनाव में से एक हो जाएगा। मुख्यमंत्री को राजनांदगांव में अपराजेय माना जाता है। राजनांदगांव उनके लिए सुरक्षित गढ़ जैसा है। बावजूद इसके जोगी का वहां से चुनाव लड़ने का ऐलान करना बड़ी राजनीतिक चाल के तौर पर देखी जा रही है। इससे पहले जोगी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में महासमुंद में विद्याचरण शुक्ल के खिलाफ चुनाव लड़कर और जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं। उस समय वे कांग्रेस में थे और विद्याचरण शुक्ल बीजेपी में।मतलब अजीत जोगी को अपने इस फैसले से दोहरा लाभ होने वाला है पहला मुख्यमंत्री के सामने चुनाव लड़ने से सुर्खिया बटोरेंगे जिसका लाभ उनकी पार्टी को अप्रत्याशिततौर पर मिलेगा और जनता के बीच निर्भक राजनेता की छवि भी बनेगी, वहीं कांग्रेस के आरोपों से क्लीन चीट जिसमें कांग्रेस उन्हे रमन का मित्र और चहेता बताती रही है।राज्य के राजनीतिक जानकारों के मुताबिक जोगी ने नामों की घोषणा कर साबित करने की कोशिश की है उनकी पार्टी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस से आगे है. छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 सीटें है जिसमें 49 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का तथा 39 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है जबकि एक एक सीट पर बहुजन समाज पार्टी और निर्दलीय विधायक हैं

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