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ब्राह्मण युवा पहल की बच्चियों से सीखें रक्तदान

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आप दुनियां से जायेंगे तो दुनियां को क्या दे कर जायेंगे? ये विज्ञापन विभिन्न चेनल्स में दिखाया जाता रहा है।इस विज्ञापन में हर व्यक्ति से ये अपेक्षा की जाती थी कि वह जनहित में नेत्रदान, देहदान,या रक्तदान जरूर करे।
देहदान धार्मिक प्रतिबद्धता के चलते अत्यंत ही कम संख्या में होता है नेत्रदान भी तात्कालिक रूप से सुविधा के अभाव के चलते कम हो रहा है लेकिन रक्तदान को महादान माना जाता हैं क्योंकि अधिकांश मामला चाहे दुर्घटना का हो या शल्य चिकित्सा का,रक्त की जरूरत पड़ती ही है।वैसे रक्त का ग्रुप होता है जिसमे O नेगेटिव यूनिवर्सल डोनर,औरAB पोसिटिव को यूनिवर्सल रिसीवर
के रूप में जाना है लेकिन कुछ ग्रुप कठिन माने जाते है जिसमे A ग्रुप को सबसे कठिन ग्रुप माना जाता है।200 व्यक्तियों में से एक व्यक्ति का रक्त इस ग्रुप का होता है।
बात रक्तदान की हो रही है तो ब्राह्मण युवा पहल सामाजिक संस्था रायपुर से जुड़ी युवा युवतियों ने इस कार्य के लिए स्वप्रेरणा से उन लोगो के लिए जो जीवन मृत्यु से जूझते है उनके जीवन को बचाने के लिए समूह में रक्तदान करने का सराहनीय कार्य कर कर खुद तो आगे हुई साथ ही समाज को भी प्रोत्साहित किया।समाज मे इस बात की भ्रान्ति है कि रक्तदान से कमजोरी आती है जबकि 250 एम.एल रक्तदान किया जाता है तो इतना नया रक्त शरीर मे 15 दिन में बन जाता है।कोई भी व्यक्ति साल में 3से 4 बार रक्तदान कर सकता है भावनगर के भावेश मेहता ने 168 बार रक्त दान किया है। ब्राह्मण युवा पहल की तरफ से सुनंदा,इशानी,तेजस्वी शर्मा सहित एक दर्जन से अधिक युवती रक्तदान, महादान के कार्य मे शामिल है।
जब ये युवतियां समाजहित में ऐसा अनुकरणीय कार्य करने के लिए आगे आ सकती है तो सभी को आगे आना चाहिए। आखिर आप इस दुनियां को कुछ दे सकते है तो किसी की जान बचाने के लिए सुनंदा,इशानी, और तेजस्वी से सीख ले सकते है।

 

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