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पदार्पण.सदगुरू_श्री_श्री_रितेश्वर_जी

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लोरमी

राजपरिवार एवं क्षेत्रवासीयों ने किया ऐतिहासिक, अभूतपूर्व स्वागत्
संत दरश को उमड़ा जनशैलाब…
ढोंगी और षडयंत्रकारीयों पर बरसे…राष्ट्रसंत,,,कहा…एक ही महामंत्र है…
हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे!
हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे!!
क्या आपको मालूम नहीं…
भूत पिशाच निकट नहीं आवे!
महाबीर जब नाम सुनावे!!
दासोहं कौशलेन्द्रस्य।।
यही कहा था न…हनुमान जी ने,,,
जब दास के नाम सुनाने से सारे भूत-पिशाच भाग जाते हैं तो, श्रीराम व श्रीकृष्ण के नाम से कोई षडयंत्र बचेगा।
जीवन में सुख और आनन्द पाना चाहते हो तो एक ही उपाय है, निरंतर सत्संग…भगवान शंकर ने यही मांगा,,,
बार बार वर मांगहूं, हरषि दीन्ह श्रीरंग।
पद सरोज अनपायनी, भक्ति सदा सत्संग।।
केवल भक्ति से काम न चलेगा,,,भगवान स्वयं कहते हैं, “अहं भक्त पराधिनों” फिर भी सत्संग की तिजौरी ही भक्ति को सुरक्षित रख सकता है अन्यथा भक्ति भी लूट जाने का डर है, भय है।
जगतजननी श्री जानकी जी ने श्री हनुमंत जी को…
अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता।
अस बर दीन्ह जानकी माता।।
एक सिद्धि को प्राप्त करने में युगों बित जाते हैं, यहां तो श्री किशोरी जी ने अष्ट सिद्धि से विभूषित कर दिया किन्तु हनुमान जी वापस कर देते हैं और कहते हैं माता जी इतनी तुच्छ वर से काम न चलेगा देना है तो यह दीजिए…
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति कर दासा।।
भगवान सर्वत्र हैं…दूध में माखन तो है पर उसे निकालने के लिये क्रिया पूर्ण करना होता है वैसे ही भगवान की प्राप्ति के लिये यत्न-प्रयत्न करना पड़ेगा केवल किसी संत महात्मा से “क्या आप भगवान दिखायेंगे” बेतुकि प्रश्न करने से नहीं मिलेंगे। “शंकरो विश्वासरूपिणौ” मन में विश्वास हो तो…जैसे हिरण्यकश्यपु के महल के खम्भे से भगवान प्रकट हो सकते हैं तो कहीं भी मिल सकते हैं, इसी जीवन में इसी युग में अन्यान्य भक्तों ने भगवान को साक्षात प्रगट किये हैं।
ठा. भूपेन्द्र सिंह जी बड़ेराजा (पूर्व विधायक) के विशेष आग्रह पर उनके गृहग्राम बोड़तरा कलां (लोरमी) पहुंचे सनातनी वेदान्त के महाव्याख्याकार, सनातनी धर्म क्रांतिदूत, वेदज्ञ, शास्त्रज्ञ, अनन्तश्री विभूषित, युग प्रवर्तक राष्ट्रसंत परमपूज्य सदगुरू भगवान “श्री श्री रितेश्वर जी” के “श्रीर राम चरित्र मानस महायज्ञ” पवित्र व्यासपीठ से ओजस्वी, तेजस्वी दिव्य प्रबोधन की कलकल करती कल्लोलवन्तनीय प्रवाहित गंगधारा में राजपरिवार सहित हजारों क्षेत्रवासी अवगाहित हुये। शुभागमन पर पारम्परिक कीर्तन मण्डली के साथ कतारबद्ध ग्रामीणजनों ने पुष्पवर्षा कर अद्वितीयभाव से संताचरण संस्कृतिनुसार अभूतपूर्व, ऐतिहासिक स्वागत किये।
इस अवसर पर मूर्धन्य विद्वत व राजनीतिज्ञजन भी उपस्थित रह द्दष्टांतिक कथा का रसपान किये।
राजपरिवार व ग्रामीणजनों का निर्निमेष भाव ने भगवतभक्ति का जागरण कर मंगलमयी वातावरण को सुंगधित बना दिया।
फिर वही…
को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु, अभी हरो हनुमान महाप्रभु…
जो कछु संकट होय हमारो..

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