Home Breaking News जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ एक्‍शन में क्‍यों हो रही देरी? पूर्व जांच अफसर ने उठाया सवाल

जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ एक्‍शन में क्‍यों हो रही देरी? पूर्व जांच अफसर ने उठाया सवाल

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जॉनसन एंड जॉनसन ने देश में 3600 घटिया हिप रिप्‍लेसमेंट सिस्‍टम बेचे हैं. केंद्रीय मंत्रालय की एक सरकारी समिति ने कंपनी के खिलाफ जांच करने के बाद फरवरी 2018 में इसका खुलासा किया था लेकिन यह रिपोर्ट 6 महीने तक दबी रही. इस बीच, महाराष्‍ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्‍ट्रेशन के पूर्व कमिश्‍नर महेश जगाडे ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. जगाडे ने ही 2011 में जॉनसन एंड जॉनसन के खिलाफ जांच शुरू की थी. उन्‍होंने कहा कि डीसीजीआई पता नहीं क्‍यों कंपनी पर कार्रवाई से पीछे हट रहा है. एक मीडिया रिपोर्ट में जगाडे के हवाले से दावा है कि डीसीजीआई के पास कंपनी के खिलाफ पर्याप्‍त सबूत हैं. जगाडे ने ड्रग कंट्रोलर ऑफिस पर आर्टिकुलर सर्फेस रिप्‍लेसमेंट (ASR) के लिए इम्‍पोर्ट लाइसेंस दोबारा जारी करने पर भी सवाल उठाया है जबकि उसे मालूम था कि 2010 में इस प्रोडक्‍ट को कंपनी ने घटिया निकलने पर वापस मंगा लिया था.

क्‍या है मामला 
कंपनी के हिप रिप्‍लेसमेंट सिस्‍टम में खामी मिलने की शिकायत पर केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने 8 फरवरी 2017 को एक समिति बनाई थी. उसने 19 फरवरी 2018 को रिपोर्ट सरकार को सौंपी. इकोनॉमिक टाइम्‍स की खबर में जगाडे ने बताया कि डीसीजीआई के दफ्तर ने दिसंबर 2013 में कंपनी के खिलाफ रिकॉल नोटिस जारी किया था.

उधर, सरकारी समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि जॉनसन एंड जॉनसन की सहायक इकाई ने खराब सिस्‍टम भारत में इम्‍पोर्ट कर बेचे जिन्‍हें पूरी दुनिया से 2010 में रिजेक्‍ट कर दिया गया था. 3 मरीज और दो रोगियों के रिश्‍तेदारों ने कंपनी के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की मांग की है. 3 रोगियों में विजय वोझला, विनय अग्रवाल और शैलेश बछेते शामिल हैं. उन्‍होंने कार्रवाई में पारदर्शिता लाने की मांग की है. केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि वह कंपनी के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई करेंगे.

सिस्‍टम लगने के बाद कई मरीज बीमार पड़े
सरकारी समिति ने रिपोर्ट में बताया कि एएसआर एक्‍सएल एक्‍टाबुलर हिप सिस्‍टम और एएसआर हिप रीसर्फेसिंग सिस्‍टम के घटिया होने की बात उसके भारत में बेचे जाने से पहले ही सामने आ चुकी थी. इन खराब सिस्‍टम के कारण मरीजों की जान पर बन आई है. ब्‍लड में कोबाल्‍ट और क्रोमियम उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गए हैं और वह जहरीला हो चुका है. मेटल ऑयन से टीशू को नुकसान हुआ और इसका असर धीरे-धीरे शरीर के अंगों पर पड़ा. इससे मरीजों को तमाम तरह की शारीरिक दिक्‍कतें शुरू हो गई हैं.

कंपनी के खिलाफ सख्‍त कार्रवाई की सिफारिश
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन और ईएनटी के प्रोफेसर डॉ. अरुण अग्रवाल की अध्‍यक्षता वाली समिति ने कंपनी के खिलाफ सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई की सिफारिश की है. समिति के मुताबिक जॉनसन एंड जॉनसन की सहायक कंपनी डीपू ऑर्थोपेडिक्‍स आईएनसी ने जो इम्‍प्‍लांट डिवाइस बनाई थी उसे अमेरिका के खाद्य और औषधि विभाग ने 2005 में मंजूरी दे दी थी. लेकिन शिकायत मिलने पर कंपनी ने 24 अगस्‍त 2010 को सभी डिवाइस वापस मंगा लीं.

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