Home Breaking News भारत के 5 राज्यों में आतंकी बेस बना रहा था हाफिज सईद, NIA की चौकसी से चौपट हुआ प्लान

भारत के 5 राज्यों में आतंकी बेस बना रहा था हाफिज सईद, NIA की चौकसी से चौपट हुआ प्लान

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भारत के शहरों में आतंकियों की भर्ती की एक बड़ी साजिश को देश की जांच एजेंसियों ने नाकाम किया है. ज़ी न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक जांच एजेंसी नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (एनआइए) ने हाफिज सईद उस बड़े प्लान का भंडाफोड़ किया है, जिसके दिल्ली, राजस्थान, श्रीनगर, गुजरात और मुंबई में हाफिज सईद अपना आतंकी अड्डा बनाने में लगा हुआ था. एनआइए की टीम मंगलवार को श्रीनगर के दो ठिकानों पर भी छापे मारे.

एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, ‘हाफिज सईद के जमात उद दावा जिसका दफ्तर पाकिस्तान के लाहौर में है, उसने अब अपना एक और बेस दुबई में बनाया है. साथ ही दुबई के जरिये कुछ हवाला कारोबारियों की मदद से दिल्ली समेत देश के कुछ राज्यों में फंडिंग की जा रही है. हमें यक़ीन है कि फंडिंग का पैसा कश्मीर में आतंकियों के पास भी भेजा जा रहा है.’

इस साज़िश का खुलासा उस वक़्त हुआ जब एनआइए ने दिल्ली के निज़ामुद्दीन इलाके से तीन हवाला ऑपरेटर को गिरफ्तार किया. इनसे पूछताछ में यह पता चला कि गिरफ़्तार तीनों आरोपी हाफिज सईद की संस्था फ़लाह ए इन्सानियत के संपर्क में थे. इनमें से एक आरोपी मोहमद सलमान कामरान से सीधे संपर्क में था.

ख़ुफ़िया एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक ‘हमारे पास इस बात की जानकारी पहले से थी कि हाफिज सईद की जमात उद दावा का हेड क्वार्टर जो कि पाकिस्तान के लाहौर में है, उसने आईएसआई की मदद से अपना एक और बेस दुबई में बनाया है. दुबई में हम पाकिस्तानी मूल के एक शख्श मोहम्मद कामरान पर हम लगातार नज़र रखे हुए थे. कामरान हाफिज सईद की एक और संस्था फ़लाह ए इन्सानियत के डिप्टी डायरेक्टर के संपर्क में था. फ़लाह ए इन्सानियत के जरिये मिलने वाला पैसा मोहमद कामरान दिल्ली के हवाला ऑपरेटर सलमान तक पहुचाता था. हाफ़िज़ सईद इस फंडिंग पर ख़ुद नज़र रखता था.’

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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हाफ़िज़ सईद दिल्ली, मुम्बई, गुजरात, राजस्थान और गुजरात में लश्कर ए तैयबा के लिए नए अड्डे बनाने की साज़िश रच रहा था. एनआइए के एक अधिकारी के मुताबिक हाफिज सईद हवाला ओपरेटर के जरिये इन पैसों को जहां कश्मीर भेजता था, जिसका इस्तेमाल आतंकी हमले के लिए किया जाता था. वहीं इस पैसे का एक हिस्सा उन लोगों को भी दिया जाता था जो जरूरतमंद होते थे. इससे फ़लाह ए इन्सानियत के प्रति हमदर्दी बनाई जा सके और फिर ऐसे लोगो की पहचान करनी होती थी, जिन्हें जरूरत पड़ने पर जेहाद के लिए लश्कर में भर्ती किया जा सके.

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