Home Breaking News ग्राम सेवक और पटवारी ने मिलकर ऐसा रिपोर्ट तैयार किया कि किसान फसल बीमा की राशि से वंचित रह गए

ग्राम सेवक और पटवारी ने मिलकर ऐसा रिपोर्ट तैयार किया कि किसान फसल बीमा की राशि से वंचित रह गए

0
0
68

सारंगढ़! कृषि विभाग के ग्राम सेवक और पटवारी ने मिलकर ऐसा रिपोर्ट तैयार किया कि 2017 के खरीफ फसल मे किसान फसल बीमा की राशि से वंचित रह गए । एक और जहां पूरे क्षेत्र को अकाल ग्रस्त घोषित किया गया था वहीं ग्राम गुढ़ियारी के ग्राम सेवक और पटवारी इस घोषणा को थोथा बताते हुए 97 परसेंट उपज की रिपोर्टिंग दे दिए। किसानों के पूरे सौ प्रतिशत नुकसान को अपने रिपोर्ट में केवल तीन प्रतिशत नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर बीमा कंपनी को दे दी जिस तीन  परसेंट को आधार मानकर बीमा कंपनी इफको टोक्यो ने  किसानों के खाते में तीन पर्सेंट की दावा  राशि किसानों की खाते  में डाल दी।
किसान परेशान होकर तहसीलदार कृषि विभाग के चक्कर काटते रहे अंत में ग्राम गोडिहारी, कुटेला के किसान एकजुट होकर कलेक्टर रायगढ़ का घेराव किये  जहां कलक्टर ने संज्ञान लेते हुए त्वरित करवाई कर कृषि  विभाग से फसल बीमा की जानकारी मांगी। जिसमें कृषि विभाग रायगढ़ के उप संचालक ने अपने रिपोर्ट में किसानों के फसल में केवल तीन परसेंट का ही नुकसान बताया। इस इस रिपोर्ट को देख कर किसानों की आंखों में आंसू आ गए कि किस तरह से एक ग्राम सेवक और पटवारी मिलकर किसानों का हक छीनकर बीमा कंपनी को फायदा पहुंचाए।
जिस तरह किसी बीमा कंपनी दावा आपत्ति में कंपनी का नियुक्त सर्वेयर  उसका आकलन का उस कंपनी को अपना रिपोर्ट  कंपनी को देता है उस हिसाब से बीमा कंपनी उक्त दावे का भुक्तान करती है ठीक उसी तरह किसानों के फसल के नुकसान का  सर्वे कृषि विभाग का ग्राम सेवक और पटवारी मिलकर किसानों के फसल के नुकसान का आकलन का बीमा कंपनी को रिपोर्ट दिएहैं। सरकार द्वारा किसानों के हितो की रक्षा किए जो कर्मचारी नियुक्त किए वह किस तरह से लापरवाही एवं अपने कर्तव्य के प्रति उदासीनता बरतते  हैं इसका इसका प्रत्यक्ष उदाहरण सहसपुर सोसाइटी के अंतर्गत आनेवाले गाँवों  के किसानों  के प्रति जो अन्याय हुआ है उसे देखने से पता चलता है।इनकी लापरवाही से आज सैकडों किसान अपने हक से वंचित रह गये।

किस तरह किया गया सुखे का आंकलन

ग्राम गोडिहारी  के किसानों ने बताया कि ग्राम सेवक  और पटवारी ने 4 किसानों के खेतों के सैंपल लिए इन चार की सालों में 3 किसान ऐसे हैं जिनके एकाध खेत में फसल अच्छा था और एक किसान के खेत में फसल सुखा था इस तरह ग्राम सेवक और पवारी द्वारा सैंपल लेने में ही गड़बड़ी की गई जान बुझ कर ऐसा सैंपल तैयार किया गया था।जिस कारण किसान बीमा फसल की राशि से वंचित रह गए।अगर किसानों के केवल 3%ही फसल का नुकसान हुआ है 97%उपज हुई है तो इन किसानों को सुखा राहत राशि मिला ही क्यों?3%सुखे का मतलब.है कि वहाँ अकाल था ही नही।

बीमा के साथ सेटिंग?

जिस तरह से फसल बीमा की रिपोर्ट तैयार की गई उसे देख कर ऐसा लगता है कि इन कर्मचारियों ने मिलकर बीम कंपनी के साथ सेटिंग तो नहीं किया ग्राम गोडिहारी के किसानों ने बताया कि जिस खेत में फसल अच्छा हुआ था उसी का सैंपल लिए जबकि गांव के लगभग 95 पर्सेंट खेतों में फसल हुआ ही नहीं इन खेतों से सैंपल लिया ही नहीं गया ग्यात हो कि गांव में एकाध खेत ऐसे होते हैं कि जहां पानी गिरा ना गिरे उस खेत में फसल होती है क्योंकि गांव के सारे निस्तार का पानी उसी खेत में जाता है।

कौन हैं बीमा क्षतिपूर्ति के हकदार

जो किसान सहकारी समितियों से खाद उधार लेते हैं उनका बीमा प्रिमियम जोडकर उनका ऋण का रकम बना दिया जाता है और ये ही पंजिकृत किसान कहलाते हैं ।भले ही पूरे गांव के किसान पूरे अकाल के चपेट मे हैं लेकिन वही किसान फसल बीमा क्षतिपूर्ति राशि के हकदार हैं जो सहकारी समिति से खाद उधार लिये हैं।।

पूरे गांव मे केवल22किसान ही सुखे का शिकार

बीमा दावा राशि मे किस तरह से गड़बड़ी की गई है किस तरह से ग्राम सेवक और पटवारी किसानों के साथ खिलवाड़ किये हैं इसका उदाहरण यहां देखने को मिलता है कि
सहकारी समिति सहसपुर मे ग्राम गोडिहारी के 117किसान पंजीकृत हैं जिनमे 22किसानों को 88%बीमा दावा राशि मिला है और इनको 3%बीमा दावा राशि मे भी शामिल किया गया है अर्थात इनको दोहरा लाभ मिला.है शेष 95किसानों को केवल 3%ही बीमा दावा राशि मिला है अर्थात बीमा कंपनी इन किसानों का बीमा प्रीमियम वापस कर दिया।इस तरह किसान पटवारी और ग्रामसेवक के बीच पीस कर रह गये।

सूखा रहत राशि मे भी गडबडी 

जो किसान पंजिकृत नही हैं उनको राज्य सरकार द्वारा सुखा राहत राशि दी ग ई है।इसमे भी गडबडी की ग ई है ।जिसको जितना मिलना चाहिये उतना नही मिला है ।क ई किसान सुखा राहत की राशि से भी वंचित रह गये हैं।सुखा राहत राशि का सरकार द्वारा जो मापदण्ड निर्धारित किये गये हैं उसके अनुसार किसी भी किसान को नही मिला है क ई किसान ऐसे भी हैं जिनको पात्रता से भी अधिक राशि मिली ं है।
इस संबंध में कृषि विभाग के तत्कालीन ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी जय सिंह चौहान से पूछने पर उन्होंने बताया किस में हमारा कोई हाथ नहीं है जो भी है सब राजस्व विभाग वाले की है राजस्व वाले महक अपना बल्ला हम पर डाल देते हैं
वहीं ग्राम गुढ़ियारी के पटवारी लोकनाथ पटेल से पूछने पर उन्होंने बताया कि हम लोग सूखा राहत का आनावरी रिपोर्ट ही दिए हैं और अना बारी रिपोर्ट में हम लोग सूखा ही बताए हैं तब तो किसानों को सूखा राहत का पैसा मिला है फसलबीमा का क्या होता है यह कृषि विभाग वाले जानेंगे।
गांव के किसान भरत लाल पटेल ने कहा कि कृषि विभाग की लापरवाही से आज हम फसल बीमा से वंचित रह गए यह आश्चर्य की बात है की कृषि विभाग वाले 97 परसेंट कृषि उपज कैसे बताए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.