Home Breaking News मिस्त्री की जॉब देने ले गए थे सऊदी, 18-20 घंटे काम, टॉर्चर ऐसा की चली गई जान

मिस्त्री की जॉब देने ले गए थे सऊदी, 18-20 घंटे काम, टॉर्चर ऐसा की चली गई जान

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हिंडौन सिटी (करौली)। तेल की दौलत से मालामाल सऊदी अरब में राजस्थान के करौली जिले के एक कर्मचारी के शोषण का मामला सामने आया है। पांच साल पहले सऊदी अरब गए इस शख्स को यह नहीं पता था कि अब वह कभी अपने परिजनों से नहीं मिल सकेगा। तीस जनवरी को वह संदिग्धावस्था में मृत मिला। कानूनी पेचीदगियों में फंसे उसके शव को भारत लाया जाना आसान नहीं है। जानिए क्या है पूरा मामला …

– गांव परीता (करौली) के मुकेश बैरवा पांच साल पहले बड़े-बड़े सपने लेकर सऊदी अरब के रियाद गया था। मुकेश को यह नहीं पता था कि वह फिर कभी परिजनों से नहीं मिल सकेगा।
– गत दिनों संदिग्ध अवस्था में सऊदी अरब में मुकेश की मौत हो गई। सख्त कानून की वजह से अब उसका शव भी गांव नहीं आ पा रहा है। मुकेश की मौत भी सवाल बनकर रह गई है।
– परिजन मुकेश बैरवा की मौत की जांच एवं उसका शव भारत लाए जाने के लिए सांसद डॉ. मनोज राजोरिया से लेकर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से भी गुहार लगा चुके हैं। परिवार के भरण-पोषण करने वाले मुकेश का अब इस दुनिया में नहीं होना परिजनों के लिए दुख की घड़ी साबित हो रहा है।

मिस्त्री के बजाय मुर्गियों की गंदगी उठाने को लगाया
– मृतक मुकेश बैरवा के साले उदय सिंह व श्यामलाल ने बताया कि मुकेश के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। मुकेश के घर में उसके माता-पिता, पांच भाई-बहन, पत्नी व चार बच्चे शामिल हैं।

– घर की तंगहाली को दूर कर दो जून की रोजी-रोटी की व्यवस्था करने के लिए वह जुलाई 2013 में मिस्त्री के काम से एजेंट के जरिए सऊदी अरब के रियाद गया था। जहां उसे भारतीय मुद्रा अनुसार 24 हजार रुपए वेतन देना तय किया गया। जहां कुछ दिन तो उसे मिस्त्री के कार्य पर लगाया गया। बाद में उसे मुर्गी पालन फार्म हाउस पर गंदगी उठाने के लिए लगा दिया। यही नहीं 8 घंटे की बजाय उससे 18 से 20 घंटे काम लिया जा रहा था। कई माह से उसे वेतन भी नहीं दिया जा रहा था। इससे वह मानसिक तनाव में चल रहा था। वेतन देने एवं काम का बोझ अधिक होने को लेकर उसका मालिक से विवाद होता रहता था।

29 जनवरी की रात साथियों के साथ खाया था खाना
– सऊदी अरब जाने के बाद मुकेश अपने गांव नहीं आया था। उसकी परिजनों से फोन पर ही बात होती थी। सऊदी अरब में ही उसके कुछ साथी-दोस्त थे जो रहते तो अलग-अलग थे, लेकिन रात में खाना साथ खाते थे। मुकेश के परिजनों से हुई बातचीत में सऊदी अरब में रह रहे साथियों ने बताया कि 29 जनवरी की रात मुकेश उनके पास आया था और साथ में खाना खाने के बाद घर चला गया था।

– 30 जनवरी को वह काफी देर तक काम पर नहीं आया। उसे देखने गए तो वह मृतक मिला। इसकी जानकारी मालिक को दी गई। उसके शव को वहीं के अस्पताल में रखवाया हुआ है।

सऊदी अरब में भारतीय कामगारों की संख्या अधिक

– भारत से बड़ी संख्या में कामगार सऊदी अरब जाते हैं। ऐसे लगभग तीस लाख भारतीय सऊदी अरब में काम करते हैं। मानवाधिकार संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कम तन्खवाहों पर काम करने वाले लगभग एक हजार मजदूरों को रोजाना सऊदी अरब जाने की मंजूरी मिलती है। भारत में बिहार से सबसे ज्यादा लोग सऊदी अरब जाते हैं।

परिजनों का बुरा हाल
– आखिरी बार मुकेश को देखने की चाहत में परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मुकेश के शव को रियाद के अस्पताल में रखवाया हुआ है। कानूनी कार्रवाई एवं मालिक एवं परिजनों के सहमति पत्र के अलावा विदेश मंत्रालय की दखल के बाद ही मुकेश का शव भारत आ पाएगा।

– गौरतलब है कि पूर्व में भी करौली, सवाईमाधोपुर, भरतपुर, दौसा आदि चार जिलों के 26 मजदूर दुबई में फंस गए थे।

इनका कहना है –
… परीता निवासी मुकेश बैरवा की सऊदी अरब में मौत होने की जानकारी से परिजनों ने उन्हें अवगत कराया है। मौत की जांच करवाने एवं शव को भारत मंगाए जाने के लिए उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को पत्र भेजा है। वे इस मामले में पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद करेंगे – डॉ. मनोज राजोरिया, सांसद करौली-धौलपुर लोकसभा क्षेत्र।

… परीता निवासी मुकेश बैरवा के परिजनों ने उनसे मुलाकात नहीं की है। परिजन उनसे मिलेंगे तो सरकार की ओर से उनकी हरसंभव मदद की जाएगी। – अभिमन्यु कुमार, कलेक्टर, करौली।

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