Home Breaking News मुखिया भले ही रमन सिंह लेकिन राजनीति पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के दिमाग में

मुखिया भले ही रमन सिंह लेकिन राजनीति पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के दिमाग में

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संपादक नीलेश शर्मा:-

छत्तीसगढ़ के मुखिया भले ही रमन सिंह हों लेकिन यहाँ की राजनीतिक दिशा सीएम हाउस से तय नहीं होती, यह तय होती है मुख्यमंत्री के बंगले से कुछ दूर सागौन बंगले से, यहाँ अपने समर्थकों से घिरे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के दिमाग में जो हलचलें पैदा होती हैं उससे छत्तीसगढ़ की पूरी राजनीति में उफान आ जाता है। छत्तीसगढ़ की राजनीतिक शतरंज की बाजी में पिछले तीन आम चुनावों से जोगी भले ही मात खा रहे हों लेकिन हमेशा शह उनकी ओर से ही आती है। इस बार फिर राजनांदगांव से चुनाव लड़ने का ऐलान कर उन्होंने सियासी हलकों में बवंडर ला दिया है।
ऐसा जोगी ने क्यों किया, कुछ लोग इसे आत्मघाती कदम मान रहे हैं और कुछ कह रहे हैं कि जोगी बाजी पलटने की क्षमता रखते हैं क्योंकि राजनांदगांव कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ रहा है। पिछले विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति यहाँ 4-2 की रही थी अर्थात चार सीटों पर कांग्रेस विजयी हुई थी और दो पर भाजपा इसमें भी एक सीट मुख्यमंत्री की थी।
सवाल यह है कि जोगी ने क्यों तय किया कि वे राजनांदगांव से बाजी लड़ेंगे। जोगी शतरंज के माहिर खिलाड़ी हैं तो जानते हैं कि जंग जीतने के लिए सबसे पहले राजा को जंग में उतारना होता है। भारतीय इतिहास में सबसे खतरनाक पलों में राजा खुद जंग के लिए उतर गए और राजा को जंग में उतरा देख सारे विरोधियों ने उन्हें घेर लिया। एक बार राजा घिर गया तो उसके पास अपने सिपाहियों का मनोबल बढ़ाने वक्त नहीं। इस प्रकार जोगी जानते हैं कि यदि उन्होंने रमन से चुनाव लड़ा तो उनका अश्वमेध घोड़ा विधानसभा चुनावों तक राजनांदगांव में ही बंधकर रह जाएगा। मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ के शेष इलाकों में घूमने के लिए वक्त नहीं मिल पाएगा। जोगी के पास खोने को कुछ भी नहीं है। इससे उन्हें मनोवैज्ञानिक लाभ मिल पाएगा और पूरे प्रदेश में यह तस्वीर बनेगी कि चुनाव जोगी कांग्रेस और भाजपा के बीच है और इस प्रकार मूल कांग्रेस पार्टी को इससे काफी धक्का पहुँचेगा।
इसके साथ ही एक महीने के भीतर जो परिस्थितियाँ बदलीं, उसने भी जोगी को यह अवसर दिया कि वे भाग्य आजमाएं। देवव्रत सिंह के जोगी कांग्रेस में प्रवेश ने उन्हें बड़ा मौका दिया। जोगी जानते हैं कि वे हार भी गए तो भी इस दाँव के चलते पूरे प्रदेश में स्कोर बढ़ा पाने में कामयाब होंगे।
छत्तीसगढ़ में जोगी बहुत बड़े नेता हैं, वे लोगों से कनेक्टर कर पाते हैं। वे धुँआधार छत्तीसगढ़ी में बोलते हैं। इसके विपरीत रमन बहुत सौम्य नेता हैं। उनकी सौम्यता उनका साथ देगी। इस सीट में मुकाबला केवल जोगी विरुद्ध रमन का नहीं है। राजनीति में भाग्य आजमा रहे इन दोनों बड़े नेताओं के बेटों का भी है जो कमोबेश उन्हीं के स्वभाव का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। अभिषेक लगातार राजनांदगांव और कवर्धा का दौरा कर रहे हैं। मधुसूदन यादव रमन सिंह के बाद राजनांदगांव में सबसे बड़े नेता हैं और महापौर के छोटे से दायित्व से बाहर निकलकर एक बड़े क्षेत्र में काम करने उत्सुक हैं। अगर इस चुनाव में उन्हें मौका नहीं दिया गया तो वे विद्रोह तो नहीं करेंगे लेकिन उनकी चुप्पी भी रमन सिंह के लिए बड़ी मुश्किल का सबब बन सकती है। इस प्रकार आंतरिक मोर्चे पर भी बड़ी चुनौतियाँ रमन सिंह के सामने हैं।
रमन के सामने जोगी की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि वे एजेंडा लेकर काम करते हैं। पहले ही दिन जब उन्होंने राजनांदगांव से लड़ने की घोषणा की तो 11 बड़े मुद्दे जनता के सामने छोड़ दिए। इस प्रकार शिगुफा छोड़ देने की कला में जोगी बड़े माहिर हैं और आक्रामकता से उसे आगे भी बढ़ाते हैं। जब रमन सिंह सौम्यता से आधे भरे गिलास की बात करेंगे तो जोगी खाली आधे गिलास का मुद्दा जनता के सामने रख देंगे और इस शिद्दत से रखेंगे कि जनता उसे तवज्जो जरूर देगी।
मोदी सरकार की बड़ी सफलताओं के बावजूद किसानों के मोर्चे पर सरकार ज्यादा कुछ नहीं कर पाई है और रमन सरकार भी इस संबंध में खास उपलब्धियाँ हासिल नहीं कर पाई है। राजनांदगांव में किसान संगठन सिर उठा रहे हैं। अगर इनका असंतोष यूँ ही बना रहा और जोगी इसे साधने में सफल हो गए तो रमन सिंह के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इस बार पेयजल संकट का मुद्दा भी अहम है। लोगों का पेट आप बोनस से भर सकते हैं लेकिन उन्हें पानी नहीं दिया तो वे चढ़ाई कर देंगे। पेयजल संकट के लिए सरकार अगर गर्मी में कुछ नहीं कर पाई तो बाजी पलटने में देर नहीं लगेगी। फिर पंद्रह साल की एंटीइनकम्बेंसी भी साथ चल रही हैं। जो भी हो छत्तीसगढ़ के चुनावों में इस बार देश भर की निगाह राजनांदगांव में लगी हैं जहाँ छत्तीसगढ़ की सियासत के दो दिग्गज पहली बार आमने सामने नजर आएंगे। इस सबसे बड़े मुकाबले में जिस भी पक्ष ने तैयारियों में थोड़ी भी कमी की तो चूक होते देर नहीं लगेगी।

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