Home States Chhattisgarh बेटे को मां से मिलाने की कोशिश में मिली कामयाबी

बेटे को मां से मिलाने की कोशिश में मिली कामयाबी

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कोरबा: नन्हें हाथी को उसकी मां और झुंड से मिलाने पिछले तीन दिनों से चलाया जा रहा ऑपरेशन बुधवार को सफल हुआ। बीमार हथिनी ठीक होकर अपने झुंड में चली गई, जिसे देखते हुए बुधवार की सुबह नन्हें हाथी को पुनः उसके पास भेजा गया। जंगल में खड़े झुंड तक बच्चे को करीब 50 मीटर दूर छोड़ा गया।

नन्हा हाथी जैसे ही अपनी मां के पास पहुंचा, दल के रक्षक हाथियों ने जोरदार चिंघाड़ लगाया। इसके बाद भी वनकर्मी वहीं डटे रहे और हाथियों ने दौड़ाने का प्रयास किया, ताकि वे दूर चले जाएं। इसके बाद वाइल्ड लाइफ टीम समेत अमला वहां से लौट आया।

नन्हें हाथी को उसकी मां से मिलाने का यह ऑपरेशन कलमलीडांड़ स्थित कंपार्टमेंट नंबर 676 पर पूरा किया गया। यहां बुधवार की सुबह वन विभाग को उस बीमार हथिनी समेत करीब 30 हाथियों के झुंड के होने की खबर मिली थी।

मां को पहले से बेहतर हालत में आकर झुंड में शामिल होने की बात स्पष्ट होते ही एक्सपर्ट्‌स ने पुनः नन्हें हाथी को उसकी मां के हवाले करने की प्रक्रिया शुरू की। सुबह करीब 11 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक सावधानी से मौके पर डटे कर्मियों ने परिस्थितियों को भांपते हुए स्टेप बाई स्टेप प्रक्रिया आगे बढ़ाई।

इसके बाद झुंड से 50 मीटर की दूरी रखते हुए नन्हा हाथी जंगल में छोड़ दिया गया। करीब 20 मिनट में ही नन्हा हाथी चलते हुए अपने झुंड में पहुंच गया और मां के पास जाकर खड़ा हो गया।

चिंघाड से दहल गया जंगल :  नन्हें हाथी के अपनी मां के पास पहुंचते ही दल के रक्षक हाथियों ने जोर दार चिंघाड़ की, जिससे सारा जंगल गूंजने लगा। उनके इस चिंघाड़ की आवाज से न केवल जंगल गूंज उठा, वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट समेत वहां मौजूद तमाम वनकर्मी भी दहल गए।

एक्सपर्ट का कहना था कि वे इस तरह बच्चे को शामिल कर लिए जाने की बात का संकेत दे रहे हैं। प्रत्येक दल में एक रक्षक हाथी होता है, तो खतरा भांपने पर झुंड से दूरी बनाकर रक्षक की मुद्रा में आ जाता है। यह वही हाथी है, तो चिंघाड़ रहा है।

इसके बाद भी जब वन अमला वहीं खड़ा होकर उन्हें देखता रहा, तो रक्षक हाथी ने आगे आकर उन्हें दौड़ाने का भी प्रयास किया। सूंड उठाकर धूल फूंकते हुए वह जब आगे आने लगा, तो वनकर्मियों ने वहां से निकल जाने में ही भलाई समझी।

अभी दो दिन और रहेगी एक्सपर्ट्‌स की टीम : 

नन्हें हाथी की बीमार मां मंगलवार की रात 8 बजे तक वहीं खड़ी थी। इसके बाद वह नजदीक के खेतों में चली गई और वहां लगे धान पर हाथ साफ कर दिया। इस बीच उसे शाम के वक्त गुड़ में दवा मिलाकर खिलाने के लिए भी छोड़ा गया था।

पानी में ग्लूकोज मिलाकर रखा था, पर न उसने गुड़ को खाया और न ही पानी को ही पीया। विभाग का कहना है वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट व चिकित्सकों की टीम अभी दो दिन और यहीं रहेगी। इस दौरान हाथियों के इस झुंड, नन्हें हाथी और उसकी मां पर लगातार नजर रखी जाएगी।

जब यह झुंड पानी पीने बाहर निकलेगा, मां और नन्हें हाथी की सेहत का पुनः आंकलन किया जाएगा। सबकुछ ठीक होने पर ही वे वापस लौटेंगे। इस झुंड ने पिछले कुछ दिनों में 26 किसानों का धान चट कर दिया है। नुकसान का आंकलन किया जा रहा है।

 

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