Home Breaking News पानी की कमी के कारण नहीं होती थी शादियां, एक अभियान ने बदली सूरत: वसुंधरा राजे

पानी की कमी के कारण नहीं होती थी शादियां, एक अभियान ने बदली सूरत: वसुंधरा राजे

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राजस्थान के रेगिस्तान में अब पानी की कोई कमी नहीं है, क्योंकि अब प्रदेश में गांव गांव में पुराने जल स्रोतों में फिर से पानी आने लगा है. ये सपना साकार हुआ है मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना के जरिए. तीन चरणों की सफलता के बाद राजस्थान में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना चौथा चरण का आगाज हुआ. राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने चौथे चरण का आगाज किया. इस चरण में 4 हजार गांवों के 1434 ग्राम पंचायतों में अभियान चलाया जाएगा.

राजस्थान में अब तीन चरणों में 12 हजार से ज्यादा गांवों की सूरत बदली. इसके साथ ही 66 शहरों में इस अभियान का असर देखा गया. मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान’ के जरिए ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया गया, जिससे आने वाली पीढ़ियां जल के मामले में अपने को महफूज और आत्मनिर्भर पाएंगी. जल स्वावलंबन योजना के जरिए पारंपरिक जल संरक्षण के तरीकों जैसे तालाब, कुंड, बावड़ियों, टांके वगैरह की मरम्मत और नई तकनीकों से एनिकट, टांके, मेड़बंदी में 80 फीसदी तक पानी पहुंचा.

वहीं, शहरी क्षेत्रों में निर्मित बावड़ियों, तालाबों, जोहड़ों की मरम्मत का कार्य किया गया. रूफ टॉप, वाटर हार्वेसिंट सिस्टम के अलावा परकोलेशन टैंक भी बनाए गए. ऐसे में अब राजस्थान लगातार आगे बढ़ता जा रहा है और एक वक्त ऐसा आएगा जब प्रदेश में पानी की कोई कमी नहीं हुई. इस दौरान मुख्यमंत्री स्टेट वाटर ग्रिड पोर्टल का लोकार्पण भी हुआ, जिसमें पानी से संबंधित आंकड़े एक पोर्टल पर देख सकेंगे.

चौथे चरण के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का कहना था कि “अभियान के बाद अब रेत के धोरों को संरक्षित करने की जरूरत पड़ जाएगी. जैसलमेर और बाड़मेर में जैसे क्षेत्रों में अब हरियाली हो गई है. आने वाले समय में प्रदेश में राजस्थान में हरियाली ही हरियाली होगी. इसी कड़ी में सरस्वती नदी को फिर से कैसे जिंदा किया जाए, इस पर भी काम करने की आवश्यकता होगी. जल की कमी की वजह से हमारे यहां शादियां नहीं की जाती थी. इस अभियान के बाद अब राजस्थान की तस्वीर बदल दी है. हमने न केवल जियोग्राफिक चेंज आया बल्कि अब सोशल चैंज भी आ गया.”

इस मौके पर पंचायतीराज मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने सीएम की दूरगामी सोच की तारीफ करते हुए कहा कि “राजस्थान में अनेक येाजनाएं चलाई गई, लेकिन ऐसा अभियान आज तक नहीं देखा गया, जिसमें सभी दलों ने मिलकर इस अभियान का आगे बढ़ाया. विधानसभा सत्र के दौरान भी सभी दल के सदस्यों ने इस अभियान की जमकर तारीफ की. सदन में इस अभियान पर कभी किसी दल में उंगली नहीं उठाई. उनका कहना था कि इस योजना के लिए राजस्थान की तस्वीर और तस्दीक पूरी तरह से बदल गई है. उनका कहना था कि 10 हजार गांवों को जोड़ने का और लक्ष्य रखा गया है. जिसमें से 37,7000 जल ढांचे में 80 फीसदी पानी पहुंच गया है.”

वहीं, मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने जल स्वावलंबन योजना को राजस्थान की जरूरत बताया. उनका कहना था कि “2016 में राजस्थान में पानी की कमी ज्यादा हो गई थी. उसके बाद जल स्वावलंबन योजना वरदान लेकर आई. इस अभियान से राजस्थान में 4% भूजल स्तर बढ़ा. न केवल देश में बल्कि विदेश में भी इस अभियान की सराहना हुई. साउथ अफ्रीका ने भी इस योजना को अपनाया. इस दौरान मुख्य सचिव ने कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए”.

नदी बेसिन परियोजना के चैयरमेन श्रीराम वैदिरे का कहना था कि “अभियान की शुरुआत से पहले सीएम राजे के साथ दिल्ली में कई चर्चाएं हुई. सीएम राजे ने अभियान की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग पर काफी निर्देश दिए. इस योजना पर सीएम राजे ने कराए गए कार्यों की जिओ टैगिंग भी करवायी. जिसकी बदौलत अब नरेगा के कार्यों की भी जियो टैगिंग हो रही है. देश के कृषि विभाग भी इस अभियान को देश के सभी राज्यो में शुरू करने जा रहा है. इस अभियान की तरह प्रधानमंत्री जल स्वावलंबन अभियान पर भी कार्य योजना बन रही है.”

नागौर में इसी अभियान की तैयारी के लिए जा रहे तीन कर्मचारियों का सड़क दुर्घटना में निधन होने की वजह से कार्यक्रम तो साधारण रूप में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस दुर्घटना पर दुख जताया. सड़क दुर्घटना में रात को रामवीर शर्मा,राजेन्द्र सिहाग,तेजाराम का निधन हो गया. इसके अलावा रामरतन, शंकरलाल और पत्नी गंभीर घायल अवस्था में जोधपुर में भर्ती हैं.घायलों का सीएम ने डाक्टर्स को फोन कर उनका हाल जाना, जिसमें उन्हें बताया गया कि तीनों घायल खतरे से बाहर हैं.

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