Home Breaking News सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर फिर से बदल गई CBI, किसको झटका, कौन भारी?

सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर फिर से बदल गई CBI, किसको झटका, कौन भारी?

0
0
46

सीबीआई में जारी हंगामे के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को झटका देते हुए फैसला सुनाया है कि अब हटाए गए सीबीआईनिदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ मामले की जांच सेंट्रल विजिलेंस कमीशन (सीवीसी) करेगी. कोर्ट के फैसले के मुताबिक यह जांच सीवीसी को महज दो हफ्ते में पूरी करनी होगी और खुद सुप्रीम कोर्ट सीवीसी की जांच की निगरानी करता रहेगा.

कोर्ट के इस फैसले से जहां केन्द्र सरकार को बड़ा झटका लगा वहीं इस फैसले का सीधा असर सीबीआई के कामकाज पर पड़ा है. सीबीआई में जारी घमासान के चलते सुप्रीम कोर्ट ने कड़े रुख से सीबीआई के दैनिक कामकाज में असर पड़ेगा.

सबसे अहम बात है कि मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने केन्द्र सरकार द्वारा नियुक्त अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव को सीबीआई में कोई भी बड़ा अथवा नीतिगत फैसला करने पर रोक लगा दी है. कोर्ट के आदेश के बाद नागेश्वर राव महज रूटीन काम करेंगे. किसी तरह का नीतिगत फैसला, किसी केस को खोलने अथवा बंद करने, किसी बड़े अफसर का तबादला करने जैसे काम उनकी कार्य परिधि से बाहर रहेंगे.

अभी तक जहां सीबीआई अपनी जांच में पूरी गोपनीयता बरतने का काम करती रही है और महज प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर अपने कामकाज का ब्यौरा उपलब्ध कराती रही है. अब कोर्ट के फैसले के बाद अंतरिम निदेशक द्वारा लिए गए सभी फैसलों को एक बंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपना होगा. इस फैसले से सीवीसी की जांच का नतीजा आने तक केन्द्र सरकार और सीबीआई के बीच सुप्रीम कोर्ट की अहम भूमिका रहेगी.

सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश एके पटनायक को नियुक्त किया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में तीनों केन्द्र सरकार, सीबीआई और सीवीसी को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि वह अपना-अपना पक्ष कोर्ट के सामने रखें.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी याचिका में वर्मा ने दलील दी थी कि सीबीआई निदेशक की नियुक्ति करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और नेता विपक्ष शामिल रहते हैं. सीबीआई निदेशक की नियुक्ति 2 वर्ष के लिए की जाती है और कार्यकाल के दौरान बिना इस समिति की अनुमति लिए हटाया अथवा तबादला नहीं किया जा सकता है.

वहीं, अपनी याचिका में वर्मा ने यह भी दावा किया था कि उन्हे पद से गलत ढंग से हटाने के बाद अंतरिम निदेशक ने सीबीआई के अधीन कई बड़े मामलों में अधिकारियों में फेरबदल करने का फैसला लिया है. वर्मा ने आशंका जाहिर की कि ऐसे फैसलों से जांच प्रभावित हो सकती है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.